Jun 23, 2026

मौसम विभाग के आंकड़े चिंताजनक, देश में औसतन चौहत्तर मिमी के मुकाबले महज सैंतीस मिमी हुई बारिश

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रांची। देश में अलनीनो के बढ़ते प्रभाव और कमजोर मानसून की गंभीर आशंकाओं के बीच मंगलवार को एक बेहद महत्वपूर्ण हाईलेवल बैठक आयोजित की गई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने देश के सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ ऑनलाइन समीक्षा बैठक कर मौजूदा खरीफ सीजन की तैयारियों का जायजा लिया। इस बैठक में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों के साथ हिस्सा लिया। बैठक के दौरान झारखंड सरकार ने अलनीनो के संभावित सूखे के प्रभाव से निपटने के लिए बनाए गए अपने 'कंटीजेंसी प्लान' (आपातकालीन योजना) की विस्तृत जानकारी केंद्र के सामने रखी और प्रभावित जिलों के अन्नदाताओं को आर्थिक संकट से बचाने के लिए विशेष राहत पैकेज की पुरजोर मांग की।

बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से 17 जून तक देश में औसतन 74 मिमी वर्षा होने का अनुमान था, लेकिन धरातल पर अब तक केवल 37 मिमी वर्षा ही दर्ज की गई है। वर्तमान में देशभर में करीब 40 प्रतिशत वर्षा की भारी कमी है और देश के 248 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक सामान्य बारिश नहीं हुई है। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि आगामी दो सप्ताह तक भी देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की ही संभावना है। केंद्रीय मंत्री को संबोधित करते हुए झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि राज्य सरकार ने मई के महीने में ही संभावित अलनीनो प्रभाव को भांपते हुए राज्यव्यापी कंटीजेंसी प्लान तैयार कर लिया था। जिला और प्रखंड (ब्लॉक) स्तर पर लगातार विशेष कृषि कार्यशालाओं का आयोजन कर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। किसानों को बदलती जलवायु के अनुसार कम पानी वाली और जलवायु-अनुकूल फसलों जैसे मड़ुवा (रागी), मक्का और दलहनी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके साथ ही, किसानों की आय सुरक्षित रखने के लिए मधुमक्खी पालन, मशरूम उत्पादन, लाह उत्पादन और मत्स्य पालन जैसी वैकल्पिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। विशेष राहत पैकेज के अलावा, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने राज्य में उर्वरकों (खाद) की उपलब्धता का मुद्दा भी केंद्रीय मंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि झारखंड सरकार ने खरीफ सीजन के लिए केंद्र सरकार से 3.90 लाख मीट्रिक टन उर्वरक की मांग की थी, लेकिन अब तक केवल 3.20 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराने पर ही सहमति मिल सकी है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया कि राज्य की विषम भौगोलिक और मानसूनी परिस्थितियों को देखते हुए शेष बचे उर्वरकों की आपूर्ति भी समय पर सुनिश्चित की जाए, ताकि संकट के इस दौर में किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।