देहरादून। उत्तराखंड के बहुचर्चित एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 13.83 करोड़ रुपये की चल एवं अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच (कुर्क) कर दिया है। यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। ईडी की देहरादून सब-जोनल इकाई द्वारा की गई इस कार्रवाई को उत्तराखंड के सबसे बड़े छात्रवृत्ति घोटालों में से एक के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जांच एजेंसी के अनुसार यह पूरा मामला वर्ष 2011-12 से 2016-17 के बीच अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े और सरकारी धन के गबन से जुड़ा है। इस दौरान समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि को कथित रूप से फर्जी लाभार्थियों और निजी शिक्षण संस्थानों के माध्यम से हड़प लिया गया। उत्तराखंड पुलिस द्वारा दर्ज मुकदमों के आधार पर ईडी ने वर्ष 2020 में मामले की जांच शुरू की थी। अब तक ईडी विशेष पीएमएलए अदालत, देहरादून में पांच अभियोजन शिकायतें (चार्जशीट) दाखिल कर चुकी है तथा पांच प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किए जा चुके हैं। ईडी का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और संगठित वित्तीय अपराध की तस्वीर उजागर की है।
फर्जी छात्रों के नाम पर निकाले गए करोड़ों रुपये
जांच में सामने आया कि कुछ निजी शिक्षण संस्थानों ने समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति योजना का दुरुपयोग करते हुए बड़ी संख्या में फर्जी और अयोग्य छात्रों को लाभार्थी दर्शाकर सरकारी धन हासिल किया। ईडी की जांच के अनुसार मदरहुड इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी (रुड़की), रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज एवं मेडिकल साइंसेज (रिम्स), हरिद्वार तथा महावीर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेरठ समेत कई संस्थानों ने अपने प्रबंधन और संबंधित ट्रस्टों के साथ मिलकर इस कथित घोटाले को अंजाम दिया। जांच में पता चला कि इन संस्थानों से जुड़े 6,208 छात्रवृत्ति दावों को जिला समाज कल्याण अधिकारी, हरिद्वार कार्यालय द्वारा संसाधित किया गया था। इस अवधि में लगभग 27.98 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति राशि वितरित दिखाई गई। इसमें से 19.74 करोड़ रुपये सीधे संस्थानों के बैंक खातों में जमा किए गए, जबकि 8.24 करोड़ रुपये छात्रों के नाम पर खोले गए खातों में भेजे गए।
2,895 दावे निकले फर्जी, 668 अनुपस्थित छात्रों को बांट दिए करोड़ों
ईडी की जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि कुल 6,208 दावों में से 2,895 दावे पूरी तरह फर्जी पाए गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार 668 ऐसे छात्रों को 3.85 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति दी गई, जो कभी कॉलेज में उपस्थित ही नहीं रहे। 84 ऐसे छात्रों के नाम पर 33.65 लाख रुपये जारी किए गए, जिन्होंने परीक्षा तक नहीं दी थी। 1,662 गैर-पंजीकृत छात्रों को 7.34 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति वितरित दिखायी गई। 47 गैर-संबद्ध पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को लगभग 29.75 लाख रुपये दिए जाने का रिकॉर्ड मिला। 434 डुप्लीकेट या अस्तित्वहीन छात्रों के नाम पर 2 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी की गई। ईडी के अनुसार यह आंकड़े समेकित रूप में तैयार किए गए हैं और प्रत्येक छात्र को केवल एक बार गिना गया है। जांच एजेंसी के अनुसार घोटाले को अंजाम देने के लिए छात्रों के नाम पर बैंक खाते खोले गए, लेकिन इन खातों का संचालन कॉलेज प्रबंधन और कर्मचारियों द्वारा किया जाता था। कई मामलों में छात्रों के बैंक खातों में कॉलेज कर्मचारियों के मोबाइल नंबर दर्ज पाए गए। प्रवेश प्रक्रिया और बैंकिंग औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए बिचौलियों की मदद ली गई। छात्रवृत्ति की राशि खातों में आने के बाद उसे वापस संस्थानों के खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था।
मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए छिपाया गया पैसों का स्रोत
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि छात्रवृत्ति से प्राप्त धनराशि को विभिन्न ट्रस्टों, सोसायटियों और संबंधित संस्थाओं के खातों में घुमाया गया ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। जांच के दौरान मनिका शर्मा का नाम भी सामने आया, जिनकी भूमिका कथित रूप से छात्रवृत्ति राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने और वित्तीय लेन-देन को संचालित करने में रही। एजेंसी के अनुसार बाद में इन पैसों का इस्तेमाल संस्थानों के संचालन, भवन निर्माण, भूमि खरीद और अन्य निजी खर्चों में किया गया। ईडी द्वारा जारी नवीनतम प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर के तहत लगभग 13.83 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां कुर्क की गई हैं। इनमें हरिद्वार और रुड़की स्थित फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) खाते, भूखंड एवं भूमि, शिक्षण एवं संस्थागत भवन, अन्य अचल संपत्तियां कल्याणकारी योजना पर डाका, गरीब छात्रों के अधिकारों पर चोट